Kafka
Kafka
Download AppDownload
AboutContactPrivacyTerms
Download App

© 2026 Kafka

  1. Home
  2. /
  3. प्रवासीलाल वर्मा के नाम पत्र
प्रवासीलाल वर्मा के नाम पत्र

प्रवासीलाल वर्मा के नाम पत्र

मुंशी प्रेमचंद

56 min
11,130 words
hi
Start Reading

ये पत्र प्रेमचंद के अंतिम वर्षों के कारोबारी और रचनात्मक संघर्ष का सजीव दस्तावेज़ हैं। लखनऊ की ‘माधुरी’ से लेकर बंबई की अजंता सिनेटोन और बनारस के ‘हंस’ कार्यालय तक — प्रेमचंद अपने प्रकाशन-सहयोगी प्रवासीलाल वर्मा से प्रेस की पूँजी, छपाई, बिक्री, हड़ताल, रॉयल्टी और साझे के हिसाब पर सीधी, बेलाग बातें करते हैं। पहले पत्रों की उत्साहपूर्ण साझेदारी अंतिम पत्रों तक आते-आते कड़वी असहमतियों में बदल जाती है। यह संग्रह प्रेमचंद के व्यक्तित्व का वह पक्ष उद्घाटित करता है जो उनकी कहानियों में नहीं दिखता — एक प्रकाशक, संपादक और मित्र की व्यावहारिक चिंताएँ। मूल पाठ हिन्दवी (रेख़्ता फ़ाउंडेशन) से लिया गया है।

हिन्दी साहित्यपत्रपत्राचारप्रेमचंदस्वतंत्रता-पूर्व साहित्यगद्यसाहित्यिक पत्रहिंदी प्रकाशनहंस पत्रिकाबीसवीं सदीक्लासिक साहित्य
LanguageHindi
Source
हिन्दवी (रेख़्ता फ़ाउंडेशन)

Books by मुंशी प्रेमचंद

हार की जीतहार की जीत
ईदगाहईदगाह
कलम, तलवार और त्यागकलम, तलवार और त्याग
कर्बलाकर्बला
गबनगबन
गोदानगोदान
अलंकारअलंकार
मंत्रमंत्र
विचार: प्रेमचंदविचार: प्रेमचंद
प्रेमचंद कहानी समग्रप्रेमचंद कहानी समग्र
नमक का दरोग़ानमक का दरोग़ा
माँमाँ
पंच परमेश्वरपंच परमेश्वर
पाँच फूलपाँच फूल
प्रेमचंद की सर्वश्रेष्ठ कहानियाँप्रेमचंद की सर्वश्रेष्ठ कहानियाँ
प्रतिज्ञाप्रतिज्ञा
सेवासदनसेवासदन
शतरंज के खिलाड़ीशतरंज के खिलाड़ी
पूस की रातपूस की रात
ठाकुर का कुआँठाकुर का कुआँ
कर्मभूमिकर्मभूमि
गल्प समुच्चयगल्प समुच्चय
रंगभूमिरंगभूमि

Similar books

दृष्टि दानदृष्टि दान
दुखवा मैं कासे कहूँ मोरी सजनीदुखवा मैं कासे कहूँ मोरी सजनी
हिंद स्वराजहिंद स्वराज
हिंदुत्व का दर्शनहिंदुत्व का दर्शन
काबुलीवालाकाबुलीवाला
जीवित और मृतजीवित और मृत
अँधेरे मेंअँधेरे में
अतिथिअतिथि
चुने हुए निबंधचुने हुए निबंध
विपात्रविपात्र
गुप्त धनगुप्त धन
हड़तालहड़ताल
क्या पाकिस्तान बनना चाहिएक्या पाकिस्तान बनना चाहिए
चाँदी की डिबियाचाँदी की डिबिया
हिन्दी भाषा की उत्पत्तिहिन्दी भाषा की उत्पत्ति
पाषाणीपाषाणी
पत्नी का पत्रपत्नी का पत्र