Kafka
Kafka
Download AppDownload
AboutContactPrivacyTerms
Download App

© 2026 Kafka

  1. Home
  2. /
  3. दुखवा मैं कासे कहूँ मोरी सजनी
दुखवा मैं कासे कहूँ मोरी सजनी

दुखवा मैं कासे कहूँ मोरी सजनी

आचार्य चतुरसेन शास्त्री

14 min
2,645 words
hi
Start Reading

“दुखवा मैं कासे कहूँ मोरी सजनी” आचार्य चतुरसेन शास्त्री की एक छोटी, मगर अत्यंत मार्मिक कहानी है। कश्मीर के दौलतख़ाने में बादशाह अपनी नई दुलहिन सलीमा को लेकर रहने आए हैं। एक रात, बादशाह की अनुपस्थिति में, सलीमा अपनी उदास और कमसिन बाँदी साक़ी से उसके दुख का कारण पूछती है। साक़ी के एकांत, उसके विषाद और एक टूटी हुई धुन के पीछे जो रहस्य छिपा है, वह धीरे-धीरे खुलता है — और कहानी पहचान, स्त्रीत्व, सम्मान और प्रेम के द्वंद्व के बीच एक त्रासद ऊँचाई तक पहुँचती है। मूल पाठ हिन्दवी (रेख़्ता फ़ाउंडेशन) से लिया गया है।

हिन्दी साहित्यहिन्दी कहानीकहानीगद्यऐतिहासिक कहानीमुग़ल कालक्लासिक साहित्यबीसवीं सदीस्वतंत्रता-पूर्व साहित्यप्रेम कहानी
PublisherKafka
LanguageHindi
Source
हिन्दवी (रेख़्ता फ़ाउंडेशन)

Books by आचार्य चतुरसेन शास्त्री

फंदाफंदा
चुने हुए निबंधचुने हुए निबंध

Similar books

प्रवासीलाल वर्मा के नाम पत्रप्रवासीलाल वर्मा के नाम पत्र
विदाविदा
कलम, तलवार और त्यागकलम, तलवार और त्याग
न्यायन्याय
हड़तालहड़ताल
पाँच फूलपाँच फूल
स्वदेशस्वदेश
चाँदी की डिबियाचाँदी की डिबिया
काबुलीवालाकाबुलीवाला
क्या पाकिस्तान बनना चाहिएक्या पाकिस्तान बनना चाहिए
परिणीतापरिणीता
ईदगाहईदगाह
नमक का दरोग़ानमक का दरोग़ा
कविताएँकविताएँ
हिंदुत्व का दर्शनहिंदुत्व का दर्शन
जीवित और मृतजीवित और मृत
बुद्ध अथवा कार्ल मार्क्सबुद्ध अथवा कार्ल मार्क्स
पोस्टमास्टरपोस्टमास्टर
माँमाँ
भिखारिनभिखारिन
पाषाणीपाषाणी
पूस की रातपूस की रात