Kafka
Kafka
Download AppDownload
AboutContactPrivacyTerms
Download App

© 2026 Kafka

  1. Home
  2. /
  3. भिखारिन
भिखारिन

भिखारिन

रवीन्द्रनाथ ठाकुर

10 min
1,984 words
hi
Start Reading

एक साधारण भिखारिन और एक संपन्न गृहस्थ के बीच का संक्षिप्त किंतु गहरा संवाद इस कहानी का केंद्र है। जब एक निर्धन स्त्री द्वार पर भीख मांगने आती है, तो यह केवल दान-पुण्य का प्रसंग नहीं रह जाता। यह मुठभेड़ मानवीय गरिमा, आत्मसम्मान और सामाजिक विभाजन की गहरी परतों को उघाड़ती है। ठाकुर अपनी विशिष्ट शैली में एक सामान्य घटना को मनोवैज्ञानिक और नैतिक प्रश्नों के केंद्र में रख देते हैं।

कहानी की विशेषता इसकी सूक्ष्म संवेदनशीलता और भावनात्मक जटिलता में निहित है। रवीन्द्रनाथ यहां दरिद्रता को केवल आर्थिक परिस्थिति के रूप में नहीं, बल्कि मानवीय रिश्तों और आत्मसम्मान के संदर्भ में देखते हैं। भिखारिन का चरित्र निरा दयनीय नहीं है—वह अपनी विपन्नता में भी एक गरिमा और आंतरिक शक्ति रखती है। कथा की भाषा सरल है, किंतु प्रत्येक शब्द में गहरा अर्थ छिपा है। यह वह कहानी है जो पढ़ने के बाद भी पाठक के मन में प्रश्न छोड़ जाती है—देने और लेने के बीच वास्तविक संबंध क्या है?

यह लघुकथा उन पाठकों के लिए है जो साहित्य में मानवीय संवेदना और सामाजिक यथार्थ का सूक्ष्म निरीक्षण चाहते हैं। ठाकुर का यह रचना-कौशल दिखाता है कि कैसे एक छोटी मुलाकात जीवन के बड़े सत्यों को उजागर कर सकती है। जो पाठक साधारण घटनाओं में असाधारण अर्थ खोजने में रुचि रखते हैं, उनके लिए यह कृति एक महत्वपूर्ण अनुभव है।

कथा संग्रहबंगाली साहित्यभारतीय साहित्यउन्नीसवीं सदीबंगाल पुनर्जागरणमानवीय संवेदनास्त्री विमर्शदार्शनिक कहानियाँरोमांटिक साहित्यसामाजिक सुधारनोबेल पुरस्कार विजेताक्लासिक साहित्यहिंदी अनुवादTagoreटैगोर
PublisherKafka
LanguageHindi
Source
tagore-hindi-stories

Books by रवीन्द्रनाथ ठाकुर

विदाविदा
पाषाणीपाषाणी
जीवित और मृतजीवित और मृत
पोस्टमास्टरपोस्टमास्टर
काबुलीवालाकाबुलीवाला
अतिथिअतिथि
दृष्टि दानदृष्टि दान
अपरिचिताअपरिचिता
पत्नी का पत्रपत्नी का पत्र
सीमान्तसीमान्त
गुप्त धनगुप्त धन
रवीन्द्रनाथ ठाकुर की कहानियाँरवीन्द्रनाथ ठाकुर की कहानियाँ

Similar books

गबनगबन
प्रतिज्ञाप्रतिज्ञा
जातिभेद का उच्छेदजातिभेद का उच्छेद
बङे भाई साहबबङे भाई साहब
कपालकुण्डलाकपालकुण्डला
शब्दशब्द
अहिल्याबाई होलकरअहिल्याबाई होलकर
परिणीतापरिणीता
मैं एक मियाँ हूँमैं एक मियाँ हूँ
ग़ज़लियात-ए-यगानाग़ज़लियात-ए-यगाना
हार की जीतहार की जीत
सेवासदनसेवासदन
सफलतासफलता
मरहूम की याद मेंमरहूम की याद में
ठाकुर का कुआँठाकुर का कुआँ