
1939 में प्रकाशित यह पुस्तक प्रेमचंद के व्यक्तित्व का एक कम जाना-पहचाना पहलू सामने लाती है — एक लेखक जो उपन्यासकार के साथ-साथ इतिहासकार और जीवन-चरित्र-लेखक भी था। पंद्रह सजीव रेखाचित्र, हर एक एक अलग व्यक्ति का जीवन-वृत्त, परन्तु सबमें एक ही प्रश्न पिरोया हुआ है — मनुष्य अपने युग में क्या योगदान देता है, और उसे क्या याद रहता है?
योद्धाओं में राणा प्रताप, रणजीत सिंह, और राणा जंगबहादुर हैं। शासकों में अकबर महान, राजा मानसिंह, और राजा टोडरमल। आध्यात्मिक नायकों में स्वामी विवेकानन्द। आधुनिक भारत के निर्माताओं में गोपाल कृष्ण गोखले, सर सैयद अहमद खाँ, बद्रुद्दीन तैयबजी, और डॉ. सर रामकृष्ण भंडारकर। साहित्य और कला के प्रतिनिधि — मौलवी वहीदुद्दीन 'सलीम', मौलवी अब्दुलहलीम 'शरर', और अंग्रेज़ चित्रकार जोशुआ रेनाल्ड्स। अंतर्राष्ट्रीय आदर्शों में इटली का गेरीबाल्डी।
प्रेमचंद की दृष्टि न महिमामंडन की है, न आलोचना की — वह 'भद्र पुरुष' की पहचान कराते हैं, अपनी सीमाओं और कमजोरियों के बावजूद जिनके जीवन ने एक मानवीय आदर्श स्थापित किया। हिन्दू-मुसलमान, राजा-प्रजा, पूर्व-पश्चिम के द्वंद्व से ऊपर उठकर वे साझे मूल्यों की खोज करते हैं। यह संग्रह एक तरह से भारत और दुनिया का एक नैतिक मानचित्र है।
यह पुस्तक उन पाठकों के लिए है जो प्रेमचंद को 'गोदान' से आगे जानना चाहते हैं — और जो इतिहास के पात्रों को सूखे तथ्यों के बजाय जीते-जागते मनुष्यों के रूप में देखना चाहते हैं।