Kafka
Kafka
Download AppDownload
AboutContactPrivacyTerms
Download App

© 2026 Kafka

  1. Home
  2. /
  3. गबन
गबन

गबन

मुंशी प्रेमचंद

8h 59m
107,657 words
hi
Start Reading

एक युवा सरकारी कर्मचारी और उसकी नवविवाहित पत्नी के जीवन में आभूषणों की चाहत एक ऐसी दरार पैदा करती है जो धीरे-धीरे उनके पूरे अस्तित्व को हिला देती है। मध्यवर्गीय समाज की महत्वाकांक्षाएं, सामाजिक प्रतिष्ठा का दबाव, और सीमित आय के बीच संतुलन बनाने की जद्दोजहद इस कथा का केंद्र है। जलपा के मन में गहनों के प्रति आसक्ति और रामनाथ की अपनी पत्नी को खुश रखने की लाचारी एक ऐसे भंवर की रचना करती है जहां से निकलना असंभव लगने लगता है।

प्रेमचंद अपनी पैनी दृष्टि से उस सामाजिक व्यवस्था को उघाड़ते हैं जो स्त्रियों को वस्तुओं के माध्यम से अपनी पहचान बनाने को मजबूर करती है और पुरुषों को झूठे सम्मान की रक्षा के लिए नैतिक पतन की ओर धकेलती है। कहानी में दिखाई देने वाली कलकत्ता की गलियां, कानपुर के बाज़ार, और छोटे कस्बों का वातावरण उपनिवेशवादी भारत की उस सामाजिक संरचना को जीवंत करता है जहां दिखावा सत्य से अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। पात्रों की मनोदशा को प्रेमचंद इतनी सूक्ष्मता से चित्रित करते हैं कि पाठक उनकी हर गलती को समझ सकता है भले ही स्वीकार न करे।

यह उपन्यास आज भी प्रासंगिक है क्योंकि यह उपभोक्तावाद, वैवाहिक संबंधों में अपेक्षाओं का बोझ, और व्यक्तिगत पतन के सामाजिक कारणों को संबोधित करता है। जो पाठक मनोवैज्ञानिक यथार्थवाद, नैतिक प्रश्नों की जटिलता, और समाज की आलोचना में रुचि रखते हैं, उनके लिए यह कृति एक गहरा अनुभव प्रदान करती है। प्रेमचंद का गद्य सरल होते हुए भी गहराई लिए है, जो पात्रों के आंतरिक द्वंद्व को बिना किसी उपदेशात्मकता के प्रस्तुत करता है।

हिंदी उपन्यासयथार्थवादसामाजिक उपन्यासनारी शोषणदहेज प्रथावैवाहिक संबंधआर्थिक संकटमध्यवर्गीय जीवनऔपनिवेशिक भारतनैतिक पतनस्त्री मनोविज्ञानभ्रष्टाचारप्रेमचंद युगसामाजिक सुधार
PublisherKafka
LanguageHindi
Source
EPUB — Public Domain

Books by मुंशी प्रेमचंद

कर्बलाकर्बला
पंच परमेश्वरपंच परमेश्वर
पूस की रातपूस की रात
प्रतिज्ञाप्रतिज्ञा
अलंकारअलंकार
विचार: प्रेमचंदविचार: प्रेमचंद
बङे भाई साहबबङे भाई साहब
माँमाँ
हार की जीतहार की जीत
सेवासदनसेवासदन
ईदगाहईदगाह
शतरंज के खिलाड़ीशतरंज के खिलाड़ी
ठाकुर का कुआँठाकुर का कुआँ
मंत्रमंत्र
बूढ़ी काकीबूढ़ी काकी
प्रेमचंद कहानी समग्रप्रेमचंद कहानी समग्र
गोदानगोदान
नमक का दरोग़ानमक का दरोग़ा
कर्मभूमिकर्मभूमि
गल्प समुच्चयगल्प समुच्चय
रंगभूमिरंगभूमि
प्रेमचंद की सर्वश्रेष्ठ कहानियाँप्रेमचंद की सर्वश्रेष्ठ कहानियाँ

Similar books

बाबू गोपीनाथबाबू गोपीनाथ
भिखारिनभिखारिन
विदाविदा
पाषाणीपाषाणी
जातिभेद का उच्छेदजातिभेद का उच्छेद
जीवित और मृतजीवित और मृत
शब्दशब्द
पोस्टमास्टरपोस्टमास्टर
काबुलीवालाकाबुलीवाला
अहिल्याबाई होलकरअहिल्याबाई होलकर
परिणीतापरिणीता
मैं एक मियाँ हूँमैं एक मियाँ हूँ
दो वृद्ध पुरुषदो वृद्ध पुरुष
अतिथिअतिथि
दृष्टि दानदृष्टि दान
अपरिचिताअपरिचिता
मूर्ख सुमंतमूर्ख सुमंत