बङे भाई साहब

बङे भाई साहब

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3,556 words
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हॉस्टल के एक कमरे में दो भाई रहते हैं। चौदह साल का बड़ा भाई दिन-रात किताबें खोले बैठा रहता है, कॉपियों के हाशियों पर चिड़ियों और कुत्तों की तस्वीरें बनाता है, और पढ़ाई की 'मजबूत बुनियाद' डालने के नाम पर एक ही दरजे में दो-तीन साल लगा देता है। वहीं, नौ साल के छोटे भाई के लिए एक घंटा भी पढ़ना पहाड़ है। वह मौका पाते ही मैदान में कंकरियाँ उछालने और कागज की तितलियाँ उड़ाने निकल जाता है।

बड़ा भाई हर साल फेल होता है और छोटा हर साल पास। फिर भी बड़े भाई के पास डांट-डपट और निगरानी का जन्मसिद्ध अधिकार है। छोटे भाई के लिए उसका हुक्म कानून है और उसे बड़े भाई के वे लंबे उपदेश सुनने पड़ते हैं, जिनमें किताबी रटंत से ज्यादा उम्र का तजुर्बा शामिल है।

बीसवीं सदी में लिखी गई यह रचना मुंशी प्रेमचंद के प्रगतिशील यथार्थवाद का हिस्सा है। दो भाइयों के रोजमर्रा के जीवन और उनके आपसी संबंधों के जरिए यह कहानी तत्कालीन शिक्षा प्रणाली पर सीधा व्यंग्य करती है।

PublisherKafka
LanguageHindi
Source
munshi-premchand-all-stories