
आचार्य चतुरसेन शास्त्री (1891–1960) हिन्दी के सर्वाधिक लोकप्रिय ऐतिहासिक उपन्यासकारों में से एक हैं। यह संग्रह उनकी तैंतालीस कहानियों को एक जगह लाता है — बौद्ध-काल की वैशाली नगरी से लेकर मुग़ल दरबार, मराठा-राजपूत वीरगाथाओं और बीसवीं सदी की दिल्ली-कलकत्ता तक की विषय-वस्तु। चतुरसेन की भाषा सहज और कथा-कहन शैली प्रवाहमयी है; उनकी स्त्री-पात्र विशेष रूप से सजीव हैं — अम्बपालिका, नूरजहाँ, क्रांतिकारिणी, रानी रासमणि, राजपूतनी। यह संकलन hindikahani.hindi-kavita.com से लिया गया है और इसमें ‘दुखवा मैं कासे कहूँ मोरी सजनी’ तथा ‘फंदा’ शामिल नहीं हैं — वे काफ़्का पर अलग-अलग पुस्तकों के रूप में पहले से उपलब्ध हैं।