
हिंदुत्व का दर्शन
3h 42m
44,289 words
hi
‘हिंदुत्व का दर्शन’ डॉ. भीमराव अंबेडकर के सबसे विस्तृत और तार्किक निबंधों में से एक है, जिसे उन्होंने 1940 के दशक में लिखा और जो उनकी मृत्यु के बाद ‘डॉ. बाबासाहब अंबेडकर: राइटिंग्स एंड स्पीचेज’ संग्रह में प्रकाशित हुआ। अंबेडकर हिंदू धर्म को धर्म-दर्शन की तुलनात्मक कसौटी पर परखते हैं और इसके छह खंडों में मनुस्मृति, हिंदू पौराणिक कथाओं तथा वर्ण-व्यवस्था की जाँच न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व की कसौटियों पर करते हैं। उनका निष्कर्ष — ‘असमानता हिंदू धर्म की आत्मा है’ — आज भी उतना ही उत्तेजक है। यह हिन्दी अनुवाद हिंदी समय (महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा) से लिया गया है।
हिन्दी साहित्यविमर्शअंबेडकर विमर्शहिंदू धर्मधर्म-दर्शनमनुस्मृतिवर्ण-व्यवस्थाजातिसामाजिक न्यायदलित विमर्शबीसवीं सदीअनुवादक्लासिक साहित्य
LanguageHindi
























