
यह मुंशी प्रेमचंद द्वारा लिखित प्रसिद्ध लघु कथाओं का व्यापक संकलन है, जो हिंदी-उर्दू साहित्य में यथार्थवादी कथा-परंपरा की आधारशिला मानी जाती हैं। प्रेमचंद ने अपने लेखन में किसानों, मजदूरों, स्त्रियों और समाज के उपेक्षित वर्गों के जीवन को केंद्र में रखा, और उनके संघर्ष, आशाएँ तथा नैतिक द्वंद्वों को अत्यंत संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत किया।
पूस की रात, कफन, ईदगाह, नमक का दरोगा जैसी कहानियाँ सामाजिक विषमता, मानवीय करुणा और जीवन की विडंबनाओं को उजागर करती हैं। प्रेमचंद की विशेषता यह है कि वे जटिल सामाजिक प्रश्नों को सरल और प्रभावशाली कथाओं के माध्यम से पाठकों तक पहुँचाते हैं, जिससे उनकी रचनाएँ आज भी उतनी ही प्रासंगिक महसूस होती हैं।
यह संग्रह भारतीय समाज, साहित्य और मानवीय मूल्यों को समझने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।