
‘भूत बेगम’ एक बाबा सतीश्वानन्द की चटखारेदार कथा से शुरू होकर नेक्रोमेंसी, तिलिस्म और मृत्यु-के-पार के अनुभवों तक जाती है। बारह अध्यायों में फैली इस कहानी में पुलिस का दबिश, बचपन की एक डायन वाले टीले की याद, नितिन चोपड़ा का दर्द भरा प्रेम और अंत में "उस पार का ज्ञान" — सब एक साथ बुने गये हैं। लेखक की भाषा सहज बोलचाल की है, पर उसमें फैन्टेसी का जो तत्व है उसे भी लॉजिक के दायरे में रखा गया है।