ग़ज़लियात-ए-ज़फ़र

ग़ज़लियात-ए-ज़फ़र

बहादुर शाह ज़फ़र

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8,296 words
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बहादुर शाह ज़फ़र (1775–1862) हिन्दुस्तान के आख़िरी मुग़ल बादशाह थे। 1857 की क्रांति के बाद अंग्रेज़ों ने उन्हें रंगून (म्यानमार) में जलावतन कर दिया जहाँ उनका इंतिक़ाल हुआ। उनकी शायरी में इश्क़, तसव्वुफ़, और वतन से जुदाई का दर्द झलकता है। "लगता नहीं है दिल मिरा उजड़े दयार में" और "बात करनी मुझे मुश्किल कभी ऐसी तो न थी" जैसी ग़ज़लें उर्दू अदब की शाहकार रचनाएँ हैं।

PublisherKafka
LanguageHindi, Urdu
Source