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देवदास

देवदास

शरतचंद्र चट्टोपाध्याय

2h 41m
32,090 words
hi
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प्रेम, परंपरा और सामाजिक बंधनों के बीच फंसा एक युवा देवदास अपने बचपन की सहेली पारो से गहरे प्रेम में है। दोनों एक साथ बड़े हुए हैं, एक ही गाँव में, जहाँ उनका रिश्ता निर्दोष और स्वाभाविक था। लेकिन जब विवाह की बात आती है, तो वर्ग और जाति की दीवारें खड़ी हो जाती हैं। देवदास के परिवार का अहंकार और सामाजिक प्रतिष्ठा की चिंता उन दोनों के बीच एक ऐसी खाई खोद देती है जो प्रेम से भी गहरी साबित होती है। देवदास, जो अपने परिवार की इच्छाओं और अपने हृदय की पुकार के बीच निर्णय नहीं ले पाता, एक ऐसे दुविधा में फंस जाता है जो उसके जीवन की दिशा बदल देती है।

शरतचंद्र की यह कृति मानवीय कमज़ोरियों और भावनात्मक पीड़ा का एक मार्मिक अध्ययन है। देवदास एक नायक नहीं है जो परिस्थितियों से लड़ता है, बल्कि एक ऐसा व्यक्ति है जो अपनी ही दुर्बलताओं का शिकार बन जाता है। चंद्रमुखी नामक एक तवायफ़ का किरदार कहानी में एक और आयाम जोड़ता है—एक ऐसी स्त्री जो समाज के हाशिये पर है, फिर भी जिसमें सच्चा प्रेम और त्याग की अद्भुत क्षमता है। लेखक की भाषा सरल पर गहरी है, जो पात्रों की आंतरिक व्यथा को बिना किसी नाटकीयता के प्रस्तुत करती है।

यह उपन्यास इसलिए प्रासंगिक बना रहता है क्योंकि यह सामाजिक दबाव, व्यक्तिगत कायरता और अधूरे प्रेम की सार्वभौमिक त्रासदी को छूता है। जो पाठक भावनात्मक जटिलताओं और मनुष्य की आंतरिक दुर्बलता के सूक्ष्म चित्रण में रुचि रखते हैं, उनके लिए यह कृति एक गहरा और विचलित करने वाला अनुभव प्रदान करती है।

बंगाली साहित्यत्रासद प्रेम कहानीसामाजिक वर्ग भेदआत्म-विनाशऔपनिवेशिक भारतग्रामीण बंगालमद्यपान और पतनअतृप्त प्रेमसामाजिक यथार्थवादपारिवारिक दबावनियति और त्रासदीवेश्यावृत्ति का चित्रणबीसवीं सदी का प्रारंभिक भारतभावुकतावाद
PublisherKafka
LanguageHindi
Source
Hindi Kavita

Books by शरतचंद्र चट्टोपाध्याय

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