
सुखमय जीवन
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2,924 words
hi
भारत मित्र (1911) में छपी यह कहानी हिन्दी के आरम्भिक हास्य की सबसे चमकदार मिसालों में है। परीक्षा देकर लौटता कथावाचक राह में आम के बगीचे का लोभ नहीं छोड़ पाता और वहीं एक बूढ़े सज्जन की नज़र में ‘सुयोग्य वर’ बन बैठता है। ‘सुखमय जीवन’ नामक पोथी, कमला की माँ की सच्चाई और एक अप्रत्याशित सगाई — तीन खण्डों में बँटी यह कथा गुलेरी की उस दुर्लभ प्रतिभा की गवाह है जो व्यंग्य को आत्म-परिहास में घोलकर परोसती है।
कहानी संग्रहहिंदी साहित्यहास्य-व्यंग्यविवाहयुवा जीवनस्वतंत्रता-पूर्व साहित्यक्लासिक साहित्यहिन्दी की अमर कहानियाँ
LanguageHindi
Source
उसने कहा था और अन्य कहानियाँ (राजपाल एण्ड सन्ज़, 2014)






















