Kafka
Kafka
Download AppDownload
AboutContactPrivacyTerms
Download App

© 2026 Kafka

  1. Home
  2. /
  3. सूरदास की झोंपड़ी
सूरदास की झोंपड़ी

सूरदास की झोंपड़ी

प्रेमचंद

15 min
2,812 words
hi
Start Reading

एक वृद्ध अंधे भिखारी की टूटी-फूटी झोंपड़ी किसी ज़मींदार की हवेली से कम महत्वपूर्ण नहीं है — यह सत्य प्रेमचंद हमें सूरदास के माध्यम से दिखाते हैं। सड़क किनारे बसी यह साधारण झोंपड़ी न सिर्फ़ एक बूढ़े की शरणस्थली है, बल्कि मानवीय गरिमा और अधिकार का प्रतीक बन जाती है। जब शक्तिशाली लोग इस निरीह व्यक्ति की एकमात्र संपत्ति पर नज़र गड़ाते हैं, तो शुरू होता है एक ऐसा संघर्ष जो समाज की नैतिक नींव को हिलाकर रख देता है।

प्रेमचंद की यह रचना उपन्यास की तुलना में लघु होते हुए भी अपने कथ्य में असाधारण गहराई रखती है। यहाँ शोषण की वह परतें खुलती हैं जो धर्म, दया और सामाजिक व्यवस्था के नाम पर चलती हैं। सूरदास की असहायता और उसके आस-पास के पात्रों की नैतिक दुविधा को लेखक ऐसी सहजता से प्रस्तुत करते हैं कि पाठक स्वयं को उस समाज का हिस्सा अनुभव करने लगता है। यह कहानी उस मध्यवर्गीय चेतना को भी उजागर करती है जो अन्याय देखकर भी चुप रहना पसंद करती है।

यह कृति उन पाठकों के लिए है जो साहित्य में केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि सामाजिक यथार्थ का दर्पण खोजते हैं। प्रेमचंद की भाषा सरल है, पर उनके प्रश्न जटिल और कालजयी हैं — न्याय क्या है, मानवता किसे कहते हैं, और कमज़ोर के पक्ष में खड़े होने की कीमत क्या है।

हिंदी कहानीप्रेमचंद साहित्यग्रामीण जीवनदलित चेतनासामाजिक यथार्थवादगरीबी और शोषणजमींदारी प्रथानैतिक संघर्षमानवीय गरिमाऔपनिवेशिक भारतकरुण रससामाजिक न्यायआदर्शोन्मुख यथार्थवाद
LanguageHindi
Source
Rekhta

Books by प्रेमचंद

दो बैलों की कथादो बैलों की कथा
दुनिया का सबसे अनमोल रत्नदुनिया का सबसे अनमोल रत्न
कफ़नकफ़न
नादान दोस्तनादान दोस्त
निर्मलानिर्मला
सद्गतिसद्गति
सतीसती
सुजान भगतसुजान भगत

Similar books

देवदासदेवदास
हिंदुत्व का दर्शनहिंदुत्व का दर्शन
ईदगाहईदगाह
कलम, तलवार और त्यागकलम, तलवार और त्याग
कर्बलाकर्बला
कंकालकंकाल
अंगारेअंगारे
दो वृद्ध पुरुषदो वृद्ध पुरुष
गबनगबन
गोदानगोदान
हड़तालहड़ताल
हतकहतक
अलंकारअलंकार
जातिभेद का उच्छेदजातिभेद का उच्छेद
क्या पाकिस्तान बनना चाहिएक्या पाकिस्तान बनना चाहिए
चाँदी की डिबियाचाँदी की डिबिया
मंत्रमंत्र
औरतों की कहानियाँऔरतों की कहानियाँ
मनुष्य का जीवन आधार क्या हैमनुष्य का जीवन आधार क्या है
मूर्ख सुमंतमूर्ख सुमंत