Kafka
Kafka
Download AppDownload
AboutContactPrivacyTerms
Download App

© 2026 Kafka

  1. Home
  2. /
  3. रस मीमांसा
रस मीमांसा

रस मीमांसा

आचार्य रामचंद्र शुक्ल

1h 2m
12,217 words
hi
Start Reading

रस मीमांसा आचार्य रामचंद्र शुक्ल की एक महत्वपूर्ण आलोचनात्मक कृति है जो हिंदी साहित्य में सौंदर्यशास्त्र और काव्यशास्त्र के क्षेत्र में एक मील का पत्थर मानी जाती है। इस पुस्तक में शुक्ल जी ने भारतीय रस सिद्धांत की गहरी और व्यवस्थित व्याख्या प्रस्तुत की है, जिसमें उन्होंने भरत मुनि के नाट्यशास्त्र से लेकर आधुनिक काल तक के रस संबंधी चिंतन को समेटा है। उन्होंने रस की उत्पत्ति, स्थायी भाव, संचारी भाव, विभाव और अनुभाव जैसे तत्वों की सूक्ष्म विवेचना करते हुए यह स्थापित किया है कि रस ही काव्य की आत्मा है।

इस कृति की मुख्य विशेषता यह है कि शुक्ल जी ने पाश्चात्य सौंदर्यशास्त्र के सिद्धांतों से तुलना करते हुए भारतीय रस सिद्धांत की श्रेष्ठता और मौलिकता को प्रमाणित किया है। उन्होंने दिखाया है कि कैसे रस सिद्धांत न केवल काव्य बल्कि संपूर्ण कला जगत के लिए एक सार्वभौमिक सिद्धांत है। पुस्तक में शुक्ल जी ने मनोविज्ञान, दर्शन और साहित्य के त्रिवेणी संगम से रस की वैज्ञानिक व्याख्या प्रस्तुत की है, जो आज भी उतनी ही प्रासंगिक और प्रभावशाली है।

रस मीमांसा का ऐतिहासिक महत्व इस बात में है कि इसने हिंदी आलोचना को एक ठोस सैद्धांतिक आधार प्रदान किया और भारतीय काव्यशास्त्र की परंपरा को आधुनिक संदर्भों में पुनर्स्थापित किया। यह कृति न केवल साहित्य के विद्यार्थियों और आलोचकों के लिए बल्कि कला और सौंदर्य के समझने वालों के लिए भी अत्यंत मूल्यवान है, क्योंकि यह भारतीय चिंतन परंपरा की गहराई और व्यापकता को प्रदर्शित करती है।

साहित्य आलोचनारस सिद्धांतभारतीय काव्यशास्त्रहिंदी आलोचनाआधुनिक काल20वीं सदीशुक्ल युगकाव्य सिद्धांतभारतीय दर्शनसौंदर्यशास्त्ररीतिकालभक्तिकालछायावादहिंदी गद्यआचार्य परंपरा
PublisherKafka
LanguageHindi
CopyrightThe source text and calculation are believed to be in the public domain.

Similar books

कलम, तलवार और त्यागकलम, तलवार और त्याग
न्यायन्याय
हड़तालहड़ताल
पाँच फूलपाँच फूल
स्वदेशस्वदेश
चाँदी की डिबियाचाँदी की डिबिया
मरहूम की याद मेंमरहूम की याद में
मैं एक मियाँ हूँमैं एक मियाँ हूँ
ईदगाहईदगाह
नमक का दरोग़ानमक का दरोग़ा
ग़ज़लियात-ए-इक़बालग़ज़लियात-ए-इक़बाल
मैं नास्तिक क्यों हूँ?मैं नास्तिक क्यों हूँ?
जातिभेद का उच्छेदजातिभेद का उच्छेद
हसरत की शाइरीहसरत की शाइरी
माँमाँ
पूस की रातपूस की रात
हार की जीतहार की जीत
मंत्रमंत्र
ठाकुर का कुआँठाकुर का कुआँ
पंच परमेश्वरपंच परमेश्वर
ग़ज़लियात-ए-यगानाग़ज़लियात-ए-यगाना
सेवासदनसेवासदन
सफलतासफलता