Kafka
Kafka
Download AppDownload
AboutContactPrivacyTerms
Download App

© 2026 Kafka

  1. Home
  2. /
  3. मैं नास्तिक क्यों हूँ?
मैं नास्तिक क्यों हूँ?

मैं नास्तिक क्यों हूँ?

भगत सिंह

27 min
5,204 words
hi
Start Reading

"मैं नास्तिक क्यों हूँ?" भगत सिंह द्वारा लिखित एक प्रभावशाली और विचारोत्तेजक निबंध है जो उन्होंने 1930-31 में लाहौर की जेल में फांसी की सजा का इंतजार करते हुए लिखा था। इस रचना में भगत सिंह ने अपने नास्तिकता की ओर बढ़ने की वैचारिक यात्रा का गहन विश्लेषण प्रस्तुत किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी नास्तिकता अहंकार या तर्कहीन विद्रोह का परिणाम नहीं थी, बल्कि गहन अध्ययन, तर्कसंगत चिंतन और वैज्ञानिक दृष्टिकोण का परिणाम थी। भगत सिंह ने इस निबंध में धर्म, ईश्वर की अवधारणा, और अंधविश्वास के विरुद्ध तर्कशील सोच की वकालत की है।

इस पुस्तक में मुख्य विषयवस्तु धार्मिक आस्था बनाम तर्कशीलता, क्रांतिकारी चेतना, और मानवतावाद है। भगत सिंह ने समझाया कि कैसे उन्होंने देश की दुर्दशा, समाज में व्याप्त असमानता और अन्याय को देखते हुए यह निष्कर्ष निकाला कि यदि ईश्वर सर्वशक्तिमान है तो वह इन अत्याचारों को क्यों नहीं रोकता। उन्होंने मार्क्सवाद और वैज्ञानिक समाजवाद के प्रभाव को भी स्वीकार किया और बताया कि कैसे तार्किक विवेचन ने उन्हें धार्मिक विश्वासों से मुक्त किया।

यह कृति भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखती है क्योंकि यह एक युवा क्रांतिकारी के आंतरिक संघर्ष और वैचारिक परिपक्वता को दर्शाती है। भगत सिंह मात्र 23 वर्ष की आयु में फांसी पर चढ़े, लेकिन उनके विचार आज भी प्रासंगिक हैं। यह निबंध दिखाता है कि वे केवल बंदूक उठाने वाले क्रांतिकारी नहीं थे, बल्कि एक गंभीर विचारक और बुद्धिजीवी थे जो समाज में तार्किक और वैज्ञानिक सोच का प्रसार चाहते थे। आज के युग में भी यह रचना युवाओं को स्वतंत्र चिंतन, प्रश्न करने की क्षमता और अंधविश्वासों से मुक्ति के लिए प्रेरित करती है।

राजनीतिक दर्शननास्तिकताधर्मनिरपेक्षताक्रांतिकारी साहित्यस्वतंत्रता संग्रामभारतीय इतिहास20वीं सदीआत्मकथात्मक निबंधतर्कवादमार्क्सवादधर्म की आलोचनाक्रांतिकारी विचारधारादर्शनशास्त्रजेल साहित्य
PublisherStandard Ebooks
LanguageHindi
CopyrightThe source text and artwork in this ebook are believed to be in the United States public domain; that is, they are believed to be free of copyright restrictions in the United States. They may still be copyrighted in other countries, so users located outside of the United States must check their local laws before using this ebook. The creators of, and contributors to, this ebook dedicate their contributions to the worldwide public domain via the terms in the [CC0 1.0 Universal Public Domain Dedication](https://creativecommons.org/publicdomain/zero/1.0/).

Similar books

ग़ज़लियात-ए-इक़बालग़ज़लियात-ए-इक़बाल
राहुल सांकृत्यायन के निबंधराहुल सांकृत्यायन के निबंध
पंच परमेश्वरपंच परमेश्वर
पूस की रातपूस की रात
जातिभेद का उच्छेदजातिभेद का उच्छेद
हसरत की शाइरीहसरत की शाइरी
अहिल्याबाई होलकरअहिल्याबाई होलकर
माँमाँ
मैं एक मियाँ हूँमैं एक मियाँ हूँ
ग़ज़लियात-ए-यगानाग़ज़लियात-ए-यगाना
हार की जीतहार की जीत
सेवासदनसेवासदन
सफलतासफलता
मरहूम की याद मेंमरहूम की याद में
ईदगाहईदगाह
ठाकुर का कुआँठाकुर का कुआँ
मंत्रमंत्र
बूढ़ी काकीबूढ़ी काकी
देवीदेवी
हिन्दी भाषा की उत्पत्तिहिन्दी भाषा की उत्पत्ति
घुमक्कड़ शास्त्रघुमक्कड़ शास्त्र
रस मीमांसारस मीमांसा
कर्मभूमिकर्मभूमि