
तमाशा जलियाँवाला बाग़ हत्याकांड से जुड़ी कहानी है जो एक बच्चे की नज़र से बयान होती है। बच्चे के लिए यह सब एक 'तमाशा' है — वो हिंसा का मतलब नहीं समझता लेकिन उसके असर से बच नहीं पाता। मंटो ने बच्चे की मासूम नज़र से औपनिवेशिक हिंसा की भयावहता को और भी गहरा बना दिया।