सआदत हसन मंटो
धुआँ बम्बई के माहौल में बसी एक कहानी है जहाँ शहर की भागदौड़ और इंसानी रिश्तों का धुआँ एक-दूसरे में घुल-मिल जाता है। मंटो ने बम्बई की ज़िन्दगी को अपनी ख़ास शैली में पकड़ा है — न बहुत सुन्दर, न बहुत बदसूरत, बस जैसी है वैसी।