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धुआँ

धुआँ

सआदत हसन मंटो

16 min
3,044 words
hi
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धुआँ बम्बई के माहौल में बसी एक कहानी है जहाँ शहर की भागदौड़ और इंसानी रिश्तों का धुआँ एक-दूसरे में घुल-मिल जाता है। मंटो ने बम्बई की ज़िन्दगी को अपनी ख़ास शैली में पकड़ा है — न बहुत सुन्दर, न बहुत बदसूरत, बस जैसी है वैसी।

हिन्दी कहानियाँउर्दू साहित्यबम्बईशहरी जीवनइश्क़फ़िल्म उद्योगमानवीय रिश्तेसामाजिक यथार्थ
LanguageHindi
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