
पंडित दया शंकर नसीम लखनवी (1811–1843) लखनऊ के एक प्रतिभाशाली शायर थे जिन्होंने कम उम्र में ही उर्दू अदब में अपनी जगह बना ली। उनकी मसनवी "गुलज़ार-ए-नसीम" उर्दू शायरी की शाहकार रचनाओं में गिनी जाती है। इस दीवान में उनकी तमाम ग़ज़लें शामिल हैं जो रेख़्ता पर हिन्दी में उपलब्ध हैं।