
आबरू
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अबरू शाह मुबारक (1683–1733) मुग़ल दौर के एक अहम रेख़्ता-गो शायर थे। उनकी ग़ज़लों में इश्क़, हुस्न और ज़िंदगी के रंग दिखते हैं। इस दीवान में उनकी तमाम ग़ज़लें शामिल हैं जो रेख़्ता पर हिन्दी में उपलब्ध हैं।
LanguageHindi
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