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पंचतंत्र

पंचतंत्र

विष्णु शर्मा

3h 48m
45,568 words
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महिलारोप्य नगर का वणिक्-पुत्र वर्धमान व्यापार के लिए मथुरा की ओर निकलता है। यमुना तट के दलदल में फँसने के कारण उसे अपने घायल बैल, संजीवक, को हिंसक जानवरों से भरे जंगल में पीछे छोड़ना पड़ता है। इस घटना से ग्रन्थ के पहले भाग—मित्रभेद—की नींव पड़ती है, जहाँ पशु-पक्षी कूटनीति और स्वार्थ की लड़ाई के मोहरे बनते हैं।

पाँच तन्त्रों में बँटी इन कथाओं के भीतर राज्य-संचालन और जीवन के दाँव-पेंच छिपे हैं: रंग में डूबकर जंगल का राजा बनने वाला सियार; संतों का स्वाँग रचता एक बगुला; वह मूर्ख बंदर जिसे बिना माँगी सीख दी जाती है; और वे परिस्थितियाँ जहाँ शारीरिक बल के बजाय केवल बुद्धि ही प्राणों की रक्षा कर सकती है।

विष्णु शर्मा द्वारा रचित यह प्राचीन भारतीय ग्रन्थ मूलतः नीति, अर्थशास्त्र और व्यावहारिक ज्ञान का दस्तावेज़ है। पशु-पक्षियों के माध्यम से गढ़ी गई यह संरचना सदियों से शिक्षाप्रद साहित्य और नैतिक मूल्यों का मुख्य आधार रही है।

लोककथानीति कथाएँसंस्कृत साहित्यपशु-पक्षी कथाएँशिक्षाप्रद साहित्यप्राचीन भारतीय साहित्यबाल साहित्यनैतिक शिक्षाजीवन मूल्यबुद्धिमत्ता और चतुराई
PublisherKafka
LanguageHindi
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Wikisource

Books by विष्णु शर्मा

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