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पंचतंत्र

पंचतंत्र

विष्णु शर्मा

3h 48m
45,568 words
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पंचतंत्र विष्णु शर्मा द्वारा रचित संस्कृत साहित्य की एक कालजयी कृति है जो लगभग दो हजार वर्ष पूर्व लिखी गई थी। यह पुस्तक पांच तंत्रों या भागों में विभाजित है - मित्रभेद, मित्रसंप्राप्ति, काकोलूकीयम्, लब्धप्रणाश और अपरीक्षितकारक। कथा के अनुसार, एक राजा के तीन अयोग्य और मूर्ख पुत्र थे जिन्हें शिक्षित करने के लिए विष्णु शर्मा ने इन कहानियों की रचना की। प्रत्येक तंत्र में पशु-पक्षियों को पात्र बनाकर नीति, राजनीति, व्यवहार कुशलता और जीवन के व्यावहारिक ज्ञान की शिक्षा दी गई है। सियार, शेर, कौआ, सांप, बंदर, हाथी और अन्य जीवों के माध्यम से मानवीय गुण-दोषों का चित्रण किया गया है।

इस ग्रंथ की सबसे बड़ी विशेषता इसकी कथा-के-भीतर-कथा की शैली है, जहां एक मुख्य कथा से अनेक उपकथाएं निकलती हैं और अंत में सभी मूल कथा से जुड़ जाती हैं। पंचतंत्र केवल बच्चों की पुस्तक नहीं है, बल्कि यह राजनीति, कूटनीति, मित्रता, शत्रुता, संधि-विग्रह और व्यावहारिक बुद्धिमत्ता का विश्वकोश है। इसके माध्यम से जीवन में सफलता के लिए आवश्यक विवेक, दूरदर्शिता, सतर्कता और व्यवहारकुशलता सिखाई जाती है।

पंचतंत्र विश्व की सबसे अधिक अनुवादित पुस्तकों में से एक है और इसका लगभग २०० से अधिक भाषाओं में अनुवाद हो चुका है। इसने ईसप की दंतकथाओं सहित विश्व साहित्य की अनेक कृतियों को प्रभावित किया है। यह पुस्तक भारतीय ज्ञान परंपरा का अनमोल रत्न है और आज भी उतनी ही प्रासंगिक है जितनी इसके रचनाकाल में थी। इसकी कहानियां सरल होते हुए भी गहन जीवन दर्शन को समेटे हुए हैं, जो पीढ़ी दर पीढ़ी नैतिक और व्यावहारिक शिक्षा का स्रोत बनी हुई हैं।

लोककथानीति कथाएँसंस्कृत साहित्यपशु-पक्षी कथाएँशिक्षाप्रद साहित्यप्राचीन भारतीय साहित्यबाल साहित्यनैतिक शिक्षाजीवन मूल्यबुद्धिमत्ता और चतुराई
PublisherKafka
LanguageHindi
Source
Wikisource

Books by विष्णु शर्मा

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