पंचतंत्र

पंचतंत्र

विष्णु शर्मा

3h 27m
41,289 words
hi

राजनीति में अनुभवहीन तीन राजकुमारों को योग्य शासक बनाना है, और इस कठिन कार्य के लिए पंडित विष्णु शर्मा एक अनोखा मार्ग चुनते हैं—वे सूखे शास्त्रों की जगह कहानियों का सहारा लेते हैं। पशु-पक्षियों की इन कथाओं में शेर, सियार, कौवे, बंदर, सांप और अनगिनत जीव अपनी बुद्धि, चालाकी और मूर्खता के माध्यम से जीवन के गूढ़ पाठ सिखाते हैं। हर कहानी के भीतर एक और कहानी खुलती है, फिर उसके भीतर एक और, मानो मातृका के गुड़ियों की तरह।

यह संग्रह मित्रता और विश्वासघात, बुद्धिमत्ता और आवेग, दूरदर्शिता और लापरवाही के बीच की महीन रेखाओं को परखता है। कहानियों का स्वर व्यावहारिक है, आदर्शवादी नहीं—यहाँ नैतिकता अक्सर जीवित रहने की कला से जुड़ी है। छल और कूटनीति को बुराई के रूप में नहीं, बल्कि संसार में टिके रहने के उपकरण के रूप में प्रस्तुत किया गया है। लोककथा की सरलता के साथ राजनीति शास्त्र की जटिलता यहाँ इस तरह घुली-मिली है कि बच्चे इसे मनोरंजन के लिए सुनते हैं और बड़े इसमें व्यवहार-ज्ञान खोजते हैं।

सदियों से यह कृति इसलिए जीवित है क्योंकि यह मानव स्वभाव की उन सच्चाइयों को पकड़ती है जो काल और भूगोल से परे हैं। यह उन पाठकों को सबसे अधिक संतुष्ट करती है जो केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि जीवन को समझने का व्यावहारिक दर्शन खोजते हैं, और जो कहानियों की परतों में छिपे अर्थों को खोलने का धैर्य रखते हैं।

PublisherKafka
LanguageHindi