विचार: महावीर प्रसाद द्विवेदी

विचार: महावीर प्रसाद द्विवेदी

महावीर प्रसाद द्विवेदी

1h 50m
21,967 words
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आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी न केवल एक साहित्यकार थे, बल्कि एक पूरी संस्था थे जिन्होंने 'सरस्वती' पत्रिका के माध्यम से हिंदी भाषा और साहित्य को एक नई दिशा और मानक प्रदान किए। प्रस्तुत संग्रह उनके वैचारिक निबंधों का एक महत्त्वपूर्ण दस्तावेज़ है। इस संकलन में द्विवेदी जी की वह मशहूर रचना 'कवियों की उर्मिला-विषयक उदासीनता' शामिल है, जिसने मैथिलीशरण गुप्त को महाकाव्य 'साकेत' लिखने की प्रेरणा दी थी। इसके साथ ही, 'स्त्री शिक्षा के विरोधी कुतर्कों का खंडन' जैसे निबंध उनकी आधुनिक सोच और रूढ़िवादी समाज को तर्क के माध्यम से बदलने की उनकी प्रतिबद्धता को उजागर करते हैं। द्विवेदी जी की लेखनी में स्पष्टता, तर्क और नैतिकता का अद्भुत संगम है। वे एक तरफ़ कालिदास के 'मेघदूत' और 'भारतीय चित्रकला' जैसे कलात्मक और सौंदर्यपरक विषयों पर विमर्श करते हैं, तो दूसरी तरफ 'समाचार-पत्रों का विराट रूप' और 'देशी भाषाओं में शिक्षा' जैसे राष्ट्रीय महत्त्व के मुद्दों पर अपनी बेबाक राय रखते हैं। यह पुस्तक उन पाठकों के लिए अनिवार्य है जो हिंदी नवजागरण (Renaissance) की बौद्धिक नींव को समझना चाहते हैं और यह जानना चाहते हैं कि आज की हिंदी पत्रकारिता और गद्य लेखन की जड़ें कहाँ हैं।

PublisherKafka
LanguageHindi