ख़ुतूत-ए-ग़ालिब

ख़ुतूत-ए-ग़ालिब

मिर्ज़ा ग़ालिब

1h 47m
21,302 words
hiur

ग़ालिब (1797–1869) ने अपने ख़तों में उर्दू नस्र को बोलचाल की सहजता, हास्य और आत्मीयता दी — औपचारिक अलंकार छोड़कर मानो दोस्त से बात कर रहे हों। रेख़्ता से लिए गए ये 50 प्रसिद्ध पत्र मीर मेहदी मजरूह, हरगोपाल तुफ़्ता और अन्य मित्रों के नाम हैं — 1857 के बाद की दिल्ली, ग़ालिब की तंगहाली, और उनका बेमिसाल अंदाज़ इनमें झलकता है। हर पत्र देवनागरी और उर्दू दोनों लिपियों में।

LanguageHindi, Urdu
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