
मंटो: दोस्तों की नज़र से
कृष्ण चंदर, उपेन्द्रनाथ अश्क, हामिद जलाल, शाहिद अहमद देहलवी, मुमताज़ शीरीं
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सआदत हसन मंटो पर लिखना उनके दोस्तों के लिए भी आसान नहीं था — वे जितने बड़े अफ़सानानिगार थे, उतने ही उलझे हुए दोस्त, भाई और मामूँ भी।
इस संग्रह में मंटो को जानने वालों के लिखे सबसे मशहूर संस्मरण और मज़मून ऑडियो में इकट्ठे हैं: कृष्ण चंदर का मज़मून; उपेन्द्रनाथ अश्क का बेबाक और लंबा संस्मरण 'मंटो मेरा दुश्मन' — दो दोस्तों-दुश्मनों की अजीब रिफ़ाक़त की कहानी; मंटो के भांजे हामिद जलाल का 'मंटो मामूँ', जिसमें घर के अंदर का मंटो दिखता है; शाहिद अहमद देहलवी का ख़ाका; मुमताज़ शीरीं की मशहूर तन्क़ीदी नज़र 'मंटो: नूरी न नारी'; और मंटो की शादी का दिलचस्प क़िस्सा।
आवाज़ें: अदबी दुनिया (Adbi Duniya) चैनल की प्रस्तुति।
Publisheradbi-duniya
LanguageHindi, Urdu























